नेता बनने की योग्यताएं
नेतागिरी जन सेवा की भावना से जन्म लेती है और फिर स्वार्थ में बदल जाती है यह अलग बात है कि अपने स्वार्थ के साथ साथ कुछ जन स्वार्थ की पूर्ति हो जाती है और यही जनस्वार्थ पूर्ति नेताजी के लिए वरदान साबित होती है। नेतागिरी लोकप्रियता हासिल करने का सर्वोत्तम माध्यम है इसके सहारे सरकार से लेकर प्रशासन तक के दिग्गजों से मेलमिलाप बन जाता है इसका फायदा अवश्य मिलता है लोकतंत्र ने नेताजी का सर्वोच्च स्थान हैं । बिना नेता के लोकतंत्र का कोई अर्थ ही नहीं रह जाता।

कहा जाता है कि इन्सान को अपनी लोकप्रियता सर्वाधिक प्रिय होती है। इसके लिए कई प्रयास करता है। दरअसल नेताजी अतिविशिष्ठ व्यक्ति की सूची में शामिल माने जाते है। अतिविशिष्ठ व्यक्ति बनने के कई उपाय है। गली, मोहल्लों में विकास समिति गठित कर अध्यक्ष बना जाईये । धीरे-धीरे ब्लाक, शहर और राज्य स्तर तक के अतिविशिष्ठ व्यक्ति बनने का मार्ग बन जाता है। युवा पीढी का रूझान नेता गिरी में ज्यादा दिखाई देता है। शुरूआत समूह लीडर से प्रारम्भ होती है फिर छात्र नेता बन जाता है। छात्र नेता के धीरे-धीरे शहर, संभाग और राज्य स्तर पर अपने पांव जमा लेते है। ऐसे कई उदाहरण है जो आज देश के कर्णधार बने बैठे है। राजस्थान का ही उदाहरण ले पूर्व गृहमंत्री स्व. गुलाब सिंह शक्तावत के पुत्र गजेन्द्र सिंह, स्व. हरिदेव जोशी के पुत्र दिनेश जोशी, स्व. हनुमान प्रसाद प्रभाकर के पुत्र दिलीप प्रभाकर, स्वं. मोहनलाल सुखाडया के पुत्र दिलीप सुखाडया आदि कई नाम है कि विरासत में मिली राजनीति के कारण अपना भाग्य आजमाया, लेकिन वर्तमान विधायक गजेन्द्र सिंह के अलावा सभी के सभी राजनीति मैदान से बाहर खडे है।
छात्र राजनीति के माध्यम से सफलता अर्जित करने वालों के नाम अंगुली पर गिने जा सकता है, जिसमें अशोक गहलोत, सी.पी.जोशी, रघुशर्मा, अश्कअली टांक, राजेन्द्र राठौड आदि ऐसे नाम है कि जो राजनीति में अपना स्थान बना चूके है वरना ऐसे छात्र नेताओं के नामो की सूची लम्बी है जो छात्र जीवन में नेता गिरी इसलिए किया करते रहे ताकि आगे जाकर अपना स्थान बनायेगें । लेकिन वह शायद यह नहीं जानते कि राजनीति ऐसा खेल है कि उसमें आगें बढने के लिए कितनों के भविष्य के साथ खिलवाड करना अनिवार्य होता है। खैर ........।
अगर आप अपनी दुकान कुछ दिनों तक चलाना चाहते है। या फिर मौके के फायदे के लिए राजनीति से जुडना चाहते है तो ठीक है वरना हमारी सलाह यह है कि नेता बने रहने का ख्याल को दिल में पालना गुनाह है। क्योकि नेता शब्द की परिभाषा बदल गई है। हमारे मित्रों का मानना है कि किसी भी व्यक्ति को जलील करने के लिए यदि सबसे मीठा शब्द है - नेता नाकि नेताजी .
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